हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: बाल वाटिका-3 के बच्चों को मिलेंगे ₹1000, जानिए पूरी योजना
हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब राजकीय स्कूलों (Government Schools) की 'बाल वाटिका-3' में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को वर्दी (यूनिफॉर्म) और स्टेशनरी के खर्च से मुक्ति देगी। इस योजना के तहत हर छात्र के खाते में सीधे ₹1000 की राशि भेजी जाएगी।
इस नए फैसले के बाद अब गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अपने छोटे बच्चों की स्कूल ड्रेस और पढ़ाई-लिखाई के सामान के खर्च की चिंता नहीं सताएगी। सरकार ने इस योजना को पूरे राज्य में तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सीधे खाते में आएंगे पैसे (Direct Benefit Transfer - DBT)
मौलिक शिक्षा निदेशक (Director of Elementary Education) की ओर से राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह राशि किसी बिचौलिए या तीसरे माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों (Parents) के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
इसके लिए डीबीटी (DBT) और पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, ताकि बिना किसी देरी और भ्रष्टाचार के पूरी राशि सीधे लाभार्थी तक पहुंचे।
₹1000 का पूरा गणित (Budget Breakdown):
सरकार द्वारा दी जाने वाली ₹1000 की राशि को दो भागों में बांटा गया है:
यूनिफॉर्म (वर्दी) के लिए: ₹800 (इससे बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस तैयार करवाई जाएगी)
स्टेशनरी और स्कूल बैग के लिए: ₹200 (इस राशि से बच्चे किताबें, कॉपी, पेंसिल और स्कूल बैग खरीद सकेंगे)
बैंक खाते खुलवाने के सख्त निर्देश
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि वे प्राथमिकता (Priority) के आधार पर सभी पात्र विद्यार्थियों के बैंक खाते खुलवाएं, ताकि डीबीटी प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए और समय पर राशि का वितरण सुनिश्चित हो सके।
वर्दी (Uniform) का रंग और स्कूल मैनेजमेंट का अधिकार
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाल वाटिका-3 के विद्यार्थियों की वर्दी का रंग और स्वरूप वही रहेगा जो उस स्कूल की पहली कक्षा (Class 1) के विद्यार्थियों का है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि अगले शैक्षणिक सत्र (Next Academic Session) में भी बच्चे इसी वर्दी का उपयोग कर सकें और उन्हें बार-बार पैसे खर्च न करने पड़ें।
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इसके साथ ही, वर्दी में किसी भी प्रकार के बदलाव या स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने का अधिकार संबंधित विद्यालय की स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) को दिया गया है।
हरियाणा सरकार का यह कदम न केवल प्राथमिक शिक्षा के स्तर को सुधारेगा, बल्कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन (Enrollment) को बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा। इस तरह की योजनाएं गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए एक बेहतरीन प्रयास हैं।

